नर्मदा से निकलने वाले पत्थर शिवलिंग के आकार के होते हैं
ग्रंथों में नर्मदा को भारत की सबसे पवित्र नदी माना जाता है। मान्यता है कि जो फल गंगा नदी में स्नान से मिलता है, वही फल मात्र नर्मदा नदी के दर्शन से प्राप्त होता है। इसका उल्लेख नर्मदा पुराण में भी किया गया है। नर्मदा से निकला हर कंकड़ भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है। नर्मदा से निकले शिवलिंग को नर्मदेश्वर भी कहा गया है। जिसका उल्लेख विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में किया गया है
नर्मदा से निकलने वाले पत्थर शिवलिंग के आकार के होते हैं। वैज्ञानिकों का मत है कि यह सब प्राकृतिक क्रिया से होता है। नदी के तेज बहाव में पत्थर बहता है, टकराता है। जिससे उसके नुकीले हिस्से टूट जाते हैं और वह शिवलिंग के आकार के रूप में परिवर्तित हो जाता है।
वहीं धार्मिक मान्यता इससे इतर है। पौराणिक विपिन शास्त्री कहते हैं कि चूंकि नर्मदा भगवान शिव की पुत्री हैं, इसलिए नर्मदा में ही शिवलिंग निर्मित होते हैं। देश की अन्य नदियों में मिलने वाले पत्थर पिंड के रूप में नहीं मिलते हैं। इससे यह प्रमाणित होता है कि केवल नर्मदा नदी पर ही शिव कृपा है।
उलटी दिशा में बहने वाली नदी
नर्मदा देश की ऐसी नदी है जो पूर्व से पश्चिम की ओर उलटी दिशा में बहती है। यह विशालकाय पर्वतों को चीरते हुए बहती है। नर्मदा के तेज बहाव में बड़े-बड़े पत्थर ध्वस्त हो जाते हैं।


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